पहले ग्लेशियल लेक के ऊपर फटा बादल, फिर टूटी झील

पहले ग्लेशियल लेक के ऊपर फटा बादल, फिर टूटी झील की दीवार… सिक्किम में रात में अचानक ऐसे आई तबाही

Sikkim Flash Floods: पहले ग्लेशियल लेक के ऊपर फटा बादल, फिर टूटी झील की दीवार… सिक्किम में रात में अचानक ऐसे आई तबाही

 

सिक्किम में आई फ्लैश फ्लड की वजह सिर्फ बादल फटना नहीं है. बादल एक ग्लेशियल लेक के ऊपर फटे. पानी के तेज बहाव और दबाव में लेक फट गई. जिससे पूरे उत्तरी सिक्किम में भयानक बाढ़ आ गई. ये ग्लेशियर चुंगथांग जिले के ऊपरी हिस्से में है, जो सिक्किम के खतरनाक 14 ग्लेशियल लेक में से एक है

यही है साउथ ल्होनक लेक, जिसके ऊपर बादल फटा और उसके बाद इस झील की दीवारें टूट गईं. (फोटोः साइंस टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट/सिक्किम सरकार)

सिक्किम (Sikkim) में जो अचानक बाढ़ (Flash Flood) आई है, उसकी कहानी 2013 में केदारनाथ (Kedarnath) में आई आपदा जैसी ही है. उत्तरी सिक्किम में जिला है मंगन (Mangan). मंगन का ऊंचाई वाला इलाका है चुंगथांग (Chungthang). चुंगथांग के हिमालय में बना है साउथ ल्होनक लेक (South Lhonak Lake). यह एक झील है जो ल्होनक ग्लेशियर पर बनी है. यानी यह एक ग्लेशियल लेक है.

इसी ग्लेशियल लेक के ऊपर बादल फटे. तेज गति से पानी गिरा. तेज बहाव और दबाव से लेक की दीवारें टूट गईं. ऊंचाई पर होने की वजह से पानी तेजी से निचले इलाकों में बहकर गया. तीस्ता नदी उफान पर आ गई. यह ग्लेशियर 17,100 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. करीब 260 फीट गहरी. 1.98 किलोमीटर लंबी और आधा किलोमीटर चौड़ी.

कुल मिलाकर यह 1.26 वर्ग किलोमीटर में फैली है. आप सोचिए इस झील से जब पानी नीचे आया होगा, तब वो अपने साथ ढेर सारा मलबा और पत्थर लेकर नीचे आया. हरे रंग में दिखने वाली तीस्ता नदी पीले और मटमैले रंग में बहने लगी. साउथ ल्होनक झील सिक्किम के हिमालय क्षेत्र के उन 14 ग्लेशियल लेक्स में से एक है, जिनके फटने का खतरा पहले से था.

 

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