एक और यदुवंशी को मिली प्रदेश की कमान, जानें देश में अब तक कितने यादव बने CM

 

भारतीय जनता पार्टी ने भले ही तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री के चयन में लंबा समय लिया हो, लेकिन उन्होंने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए चुनावी समीकरण को भी इस चयन के जरिए साधने की कोशिश की है. तीन राज्यों के जरिए उन्होंने एक आदिवासी, एक ओबीसी और एक ब्राह्मण मुख्यमंत्री देकर बड़ा दांव चला है. एमपी को मोहन यादव के रूप में नया मुख्यमंत्री मिला है. विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद भारतीय जनता पार्टी को तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के ऐलान में एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लग गया. लंबे कवायद और कई दौर की चली बैठक के बाद बीजेपी ने मध्य प्रदेश के लिए सरप्राइज मुख्यमंत्री का ऐलान करते हुए मोहन यादव को प्रदेश की कमान सौंप दिया. सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी पार्टी ने सभी को चौंकाते हुए पुराने के चेहरों की जगह नए चेहरों को मौका दिया और प्रदेश की चाभी उसके हाथों में सौंप दी. बीजेपी ने इन तीनों ही प्रदेशों में मुख्यमंत्री तय करते वक्त अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रखा. मोहन यादव को एमपी की कमान सौंपने का मतलब है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के यादवों का वोटबैंक में सेंध लगाने की योजना.

दिल्ली से शुरू हुआ यदुवंशी CM का सिलसिला

1951 में दिल्ली में हुए चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिली और देशबंधु गुप्ता मुख्यमंत्री बनने वाले थे, लेकिन उनकी एक हादसे में मौत हो गई. फिर जवाहर लाल नेहरू के कहने पर ब्रह्म प्रकाश को मुख्यमंत्री बनाया गया. वह 17 मार्च 1952 से लेकर 12 फरवरी 1955 तक मुख्यमंत्री पद पर रहे. बाद में वह 4 बार सांसद भी चुने गए. वह शेर-ए-दिल्ली के नाम से भी जाने जाते थे. सादगी पसंद ब्रह्म प्रकाश मुख्यमंत्री रहने के दौरान सरकारी बस से ही सफर किया करते थे. इस तरह देश की राजधानी दिल्ली से देश को पहला यदुवंशी मुख्यमंत्री मिला था. खास बात यह है कि उनका परिवार मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी शहर का रहने वाला था.

बेहद दिलचस्प बात है कि देश के दूसरे यदुवंशी मुख्यमंत्री का नाता भी हरियाणा से रहा. दिल्ली के बाद दूसरा यदुवंशी सीएम हरियाणा से मिला. ब्रह्म प्रकाश के सीएम बनने के 12 साल बाद राव वीरेंद्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. वह राव तुलाराम के वंशज हैं और यदुवंशी अहीर बिरादरी से नाता रखते हैं. राव वीरेंद्र सिंह हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री (24 मार्च 1967-2 नवंबर 1967) बने. इससे पहले वह अविभाजित पंजाब में मंत्री भी रहे थे.

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